EROS TIMES: एमिटी हाइड्रोजन मिशन पहल के अंर्तगत आपसी सहयोग की संभावानाओं पर चर्चा करने के लिए आज एरॉक्स निगेन इक्वीपमेंट प्राइवेट लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने एरॉक्स नाइजेन के संस्थापक और एमडी अनिल अग्रवाल के नेतृत्व में एमिटी विश्वविद्यालय का दौरा किया और एमिटी के शोधार्थियों और वैज्ञानिकों द्वारा हाइड्रोजन मिशन के क्षेत्र में कर रहे अनुसंधान की जानकारी प्राप्त की।
इस प्रतिनिधिमंडल में एरॉक्स नाइजेन के सीइ्रओ सुनिल पुरी और मुख्य रणनीति अधिकारी अनिरूद्ध अग्रवाल भी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल का स्वागत एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा. बलविंदर शुक्ला और एमिटी साइंस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती द्वारा किया गया।
एरॉक्स निगेन के संस्थापक और एमडी अनिल अग्रवाल ने संबोधित करते हुए कहा कि एमिटी द्वारा किये जा रहे अनुसंधान कार्यक्रमों ने हमें प्रभावित किया है। भारत मे कुशल मानवसंसाधन, उर्जा एवं फंड सभी उपलब्ध हैै इसके बावजूद ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में अन्य देशों की तुलना में पीछे है। प्रधानमंत्री ने भारत को विकसित देश बनाने का संकल्प लिया है और इसमें हम सभी का योगदान आवश्यक है। एमिटी जैसे वैश्विक स्तर संस्थानो के कारण हमें ज्ञान एवं नई प्रौद्योगिकियों के लिए विदेशी शोध संस्थानों पर निर्भर नही होना होगा। अकादमिक और उद्योगो का आपसी सहयोग आवश्यक है।
एरॉक्स नाइजेन के मुख्य रणनीति अधिकारी अनिरूद्ध अग्रवाल ने हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में अवसरों की भरमार है। स्न 2030 तक भारत में ग्रीन हाइड्रोजन का बाजार लगभग 8 बिलियन डॉलर का होगा जो भारतीय उत्पादन और वैश्विक उभरती प्रौद्योगिकियो के बाजारं को बृहद विकास के अवसर देगा। अग्रवाल ने कहा कि भारतीय सरकार की नितियां और पहल जिसमें इलेक्ट्रसेलायजर और ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन पर इंसेटिव, विभिन्न क्षेत्रों को बढ़ावा देना शामिल है। इस दौरान उन्होने कंपनी के विभिन्न यूनिट और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी दी।
एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा बलविंदर शुक्ला ने कहा कि एमिटी छात्रों को शोध व नवचार के लिए प्रेरित करता है और इसके साथ उन्हे स्वंय का उद्यम प्रारंभ करने के लिए प्रोत्साहित करता है। देश की अर्थव्यवस्था मे योगदान देकर ही विकसित भारत मिशन के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। हाइड्रोजन विशेषकर ग्रीन हाइड्रोजन एक अग्रणी क्षेत्र है जहां राष्ट्र विकास के लिए उद्योगों और अकादमिक का सहयोग आवश्यक है।
एमिटी साइंस टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फांउडेशन के अध्यक्ष डा डब्लू सेल्वामूर्ती ने एमिटी हाइड्रोजन मिशन के अंर्तगत हम ग्रीन हाइड्रोजन इपर अनुसंधान व पेटेंट को बढ़ावा दे रहे है। हम एरॉक्स नाइजेन के साथ विभिन्न क्षेत्रे से जैसे कुशल मानव संसाधन तैयार करने, क्षमता निर्माण करने, विशेष प्रशिक्षण देने के साथ समस्या का हल खोजने, अनुसंधान व नवाचार की गई तकनीक का उपयोग करने आदि क्षेत्रों में कार्य कर सकते है।
इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल ने एमिटी विश्वविद्यालय की विभिन्न प्रयोगशालाओं का दौरा किया। कार्यक्रम के दौरान एमिटी फांउडेशन फॉर साइंस टेक्नेालॉजी एंड इनोवेशन एलायंस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डा. ए के सिंह ने एमिटी के शोध व विकास पारिस्थितिक तंत्र पर प्रस्तुती दी। इसके अतिरिक्त फैकल्टी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की डीन डा. सुनिता रतन, एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ एंडवास रिसर्च स्टडीज के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. वी के जैन, एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ एप्लाइड साइंस के डा. मनोज रौला, एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ नैनोटेक्नोलॉजी की डा. सुमन उपाध्याय ने अपने विचार रखे।